नारा (नाड़ा) से रउआँ परिचित बानी का? हम पाजामा अउर जँघिया में की नारा के बात नइखीं करत। हम बात करतानी एगो बेमारी के। अगर रउआँ गाँव-देहात में रहल होखब त ए बेमारी से जरूर परिचित होखबि। हम रउआँ के बता दीं की कुछ लोग एके पोतनहर भी कहेला। वइसे पोतनहर ओ बरतनो के कहल जाला जवने में माटी, गोबर आदि घोरि के रखल रहेला अउर कच्चा दीवाल, जमीन आदि लीपले की काम आवेला। पहिले जब गँउअन में माटी के घर रहत रहे त हर घर में पोतनहर अउर पोतना सान से बिराजत रहे। सबेरहीं-सबेरहीं घर-दुआर आदि बहरले की बाद माई, काकी, भउजी जाहें ईया पोतनहर उठाके रसोइयाघर जरूर लिपि देव लोग।
खैर हम त इहाँ नारा के बात करे आइल रहनी हँ अउर झूठे पोतनहर में अझुरा गइल रहनी हँ। सुनी-सुनी अब पोतनहर में अझुराइले बानी त एगो अउरी बात क्लियर क दीं, उ इ की बरसाते में गाँव आदी की कच्ची सड़कन पर से गुजरत मटरसाइकिल, टेक्सी आदि अगल-बगल से गुजरत मनई लोगन की कपड़न के पोतना बना देनीसन। कहले की मतलब इ बा की कानो-माटी (कीचड़) में से गुजरत ए गाड़ियन की टायरन से उड़त छींटा कपरा खराब क के रखि देला।
अब आईं नारा...के जानि लेहल जाव। भोजपुरिया लोग नारा लगवले में माहिर होला। कवनो पार्टी के टेक्सी गाँव में घुसो, ओ टेक्सी की पीछे नारा लगावत जरूर 10-20 जने लउकि जाई लोग।
अब आईं बेमारी नारा के जान लेहल जाव। हमरा लागता की इ बेमारी खाली भोजपुरिए समुदाय में पावल जाले। हम बहुत कोसिस कइनी की ए बेमारी खातिर अंग्रेजी भा अन्य भारतीय भासावन में कवनो प्रतिशब्द मिल जाव पर ना मिलल। भोजपुरिया की अलावा हम जे से भी ए बेमारी के जिक्र कइनी उ इहे कहल की इ बेमारी हमरी इहाँ ना होला, चाहें होतो होई त ए के का कहल जाला पता ना..अउर हमनीजान एके बइठवइबो ना करेनीजाँ।
अब बताईं जे भोजपुरिया आपन गाँव-घर छोड़ि के महानगरन के बासी हो गइल बा उ हो विसेसकर अहिंदीभासी छेत्रन में...उहाँ अगर ओकरा नारा उकसि गइल त केसे बइठवाई? हँ कहीं-कहीं कुछ भोजपुरिया लोग बा जे ए नारा के बइठा देला।
कहल जाला की भारी-भरकम सामान आदि उठा देहले से भी नारा हो जाला। गाँव में हम देखले बानी..कुछ लोग के नारा बइठावत।
नारा बइठावेवाला जेकरा नारा उकसल रहेला ओके समतल जगही, चउकी आदि पर कुछ पातर बिछौना बिछा के सीधा पीठि की बल सुता देला लोग अउर ओकरी बाद कड़ु के तेल लेके ओकरी पेटे के मालिस करेला लोग। मालिस करत-करत उ लोग पेट की चारू हिस्सा से मालिस करत हाथे के पेट की बीचो-बीच ले आवेला लोग। ए तरह से नारा धीरे-धीरे पेटे की बीच में आ जाला अउर ओकरी बाद नारा बइठावे वाला ओ नारा के पकड़ि के ओ मनई (जेकरा नारा उकसल बा) के फटाक से उठा के बइठा देला लोग अउर ए तरह से नारा बइठि जाला।
कुछ लोग त का करेला (जेकरा नारा उकसल बा), पेड़े आदि पर बिलारी (एक तरह के वेयायाम) छानि देला लोग। एहु से नारा बइठि जाला।
अरे भाई हमरी गाँव में त एक जाने नारा बइठावे वाला रहलन, उ का करें की काँखे की लगे के एगो नसिए पकड़ि के नारा बइठा दें।
नारा बइठावे के एगो सबसे खतरनाक तरीका (कबो भुलाइयो के ए तरे नारा मति बइठवाइबि जा) इ बा कि लोग लोटा आदि में पानी आदि लेके चाहें ओ में कुछ जरा के पेटवे पर सटा देला। इ बहुते खतरनाक ह। ए में जान गइले के खतरा पूरा बा। नारा भले मति बइठो पर ए तरे नारा बइठवावल जरूरी नइखे।
कुछ लोग त नारा ना उकसल रहेला फिर भी देहीं चँटवावे खातिर अउर पेट मड़वावे खातिर नारा बइठवावेला पर जेयादे पेट के मड़वावलो ठीक ना ह।
खैर इ बेमारी भोजपुरिया समुदाय में रचि-बसि गइल बा। जेकरा पेट में कुछ ना पचो ओकरो के इ बेमारी बा अउर जे पचावल चाहेला ओकरो के इ बेमारी ध लेला। रउआँ ए बेमारी से बचल रहीं...इहे भगवान से चिरउरी बा।
जय हिंद।।
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