भोजपुरी गीतन के आनंद लीं

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बृहस्पतिवार, 26 मई 2011

कुछु होखो, ह त अपने छोट भाई नू


बिहाने-बिहाने भाई-भउजाई में का बहस सुरु हो गइल बा?
कुछ ना बाबू। राउर भइया दिमाग से कम दिल से जेयादे सोंचेनी।
आछा-आछा! त बहस भइया अउर भउजी में न हो के दिल अउर दिमाग में बा।
ना बाबू, एइसन कवनो बात नइखे, तोर भउजी कवनो बात पर अड़ि जइहें त दूसरे के एकदम ना सुनल चाहेली।
खैर, जवन कुछ होखो, पर भइल का, तनि हमहुँ जान सकेनी का?
अरे बबुनवा ते हीं बताउ, ते हमार छोट भाई हउवे। अगर तोसे कवनो गलती हो जाव त का हम ओही के हरदम ढोअबि। भगवान न करें की तोरी पर कबो कवनो आफति आवो पर अगर आइए गइल त हम तोर मदद ना करबि त के करी। अउर एतने ना इ हमार फरज बनता की हम दुख-सुख में तोर खेयाल राखीं।
हँ भइया, इ त तूँ एकदम सही कहतारS। अगर तूँ हमार खेयाल ना रखबS त के राखि।
हम मानत बानी की राउर भाइए राउर खेयाल रखिहें, दुख-सुख में रउरी साथे रहिहें पर कबले, जबले रउआँ अपनी भाई के भाई मानबि। जब रउआँ अपनी भाई के भाई ना दुस्मन माने लागबि अउर अपनी भाइए के बिलववले की चक्कर में पड़ि जाइब त रउआँ भाई केइसन रहि गइनीं?
अरे भउजी, तोहलोगन के बाति हमरी पल्ले नइखे पड़त। तूँ आ भइया कवने मुद्दा पर बहस करतार जा, हमरी समझ में नइखे आवत।
अछा बाबू, एगो बाति बताउ, अगर बाहीं में फूँका हो जाई त ओ फूँका के दवाई करावल जाई आकि बहिंए के काटि के फेंकि देहल जाई?
ना भइया, ओकर दवाई करावल जाई। अरे उ अपने न अंग ह। ओकरी ना रहले पर बहुत तकलीफ होई। 
ए बाबू, रउआँ अपनी भइया की हँ में हँ मिलावत बानी। पर अगर हमसे पूछबि त हम त इहे कहबि की जरूरत पड़ले पर बहिंयो के काटि देहल बहुत जरूरी होला।
अरे, भइया-भउजी, पहिले हमके अब इ त बतावजा की असली बात का बा, जवने पर बहस एतना उग्र रूप ले ले बा।
कुछ ना बाबू, हम तोहरी भउजाई से इहे कहत रहनी हँ की बेचारा पाकिस्तान, ह त अपने अंग न। अपने छोट भाई ह। आज उ केतना मुसीबत में बा। उहाँ जगहि-जगहि बराबर बम धमाका हो रहल बा। केतने अपने भाई-काका मारल जा रहल बाने। हँ इहो ठीक बा की पाकिस्तान कुछ गलतियो कइले बा। पर भारत में आतंकवाद की पीछे पाकिस्तान ना कुछ कट्टरता वाला मानसिकता बा। जे ना हिंदुस्तान के भला देखि सकेला ना पाकिस्तान के।
रउरी भइया के, के समझाओ, ए बाबू। इहाँ के पाकिस्तान में जवन हो रहल बा उ त लउकता पर हिंदुस्तान में उ जवन करवलसि अउर करावता उ नइखे लउकत। अरे पाकिस्तान में जवन हो रहल बा, उ बहुत अच्छा हो रहल बा। जे खुदे बारुदे पर आपन घर बनाई उ कबो सुखी ना रही। हम त इहे कहबि की जइसन के तइसन। मर रहल बा पाकिस्तान त मरो, हमनियों जान के त रकत के आँसू रोवले बा।
देखS जा, भइया अउर भाभी, तोहS लोगन अपनी-अपनी जगही दुनु जाने सही बाड़S जा।
का सही बाड़S जा रे? अरे हमनी जान के पाकिस्तान के मदद करे के चाहीं। कुछ एइसन करे के चाहीं की उ हो अंधकार, मारकाट से निकलि के विकास की रास्ता पर आगे बढ़ो। अगर उहाँ शांति स्थापित होई त एसे हमनियोजान के अउर पूरा विश्व के फायदा होई। तोरी भउजी के, के समझाओ, इ ए बाति के समझले नइखी चाहत, कुछु होखो, ह त अपने छोट भाई नू।

छोट भाई, छोट भाई, कइले रहीं। अरे अगर हमार बस चले ना त ए छोट भाई के दउड़ा-दउड़ा के मारबि। इ छोट भाई एइसन बा की एक त करता चोरी अउर उपर से सीनाजोरी। इ मलेछउ कबो चैन से ना रहिहें।
अरे-रे-रे भउजी कहाँ चलि देहलू? सुनS-सुनS। 
अरे हम जाइबि कहाँ ए बाबू। कपरा धोवे जा तानी। रउआँ अउर राउर भइया बइठि के पाकिस्तान के खैर मनाई सभें अउर जवन उहाँ हो रहल बा ओपर आँसू बहाईं सभें।

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