भोजपुरी गीतन के आनंद लीं

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बुधवार, 4 मई 2011

विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन के 10 वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न

भोजपुरी सनमान के माँग भइल तेज
 दिनांक 23-24 अप्रैल के देवभूमि ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के मुक्ताकाश मंच पर आयोजित विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन के दसवाँ  राष्‍ट्रीय अधिवेशन सफलता पूर्वक संपन्न हो गइल। 
उदघाटन
सम्‍मेलन के उद्घाटन 23 अप्रैल के वरिष्‍ठ भाजपा नेता श्री कलराज मिश्र की द्वारा कइल गइल। ए अवसर पर देश -विदेश से आइल तमाम भोजपुरिया लोगीं की साथे-साथे स्‍थानीय लोग भी भारी संख्‍या में उपस्थित रहने। श्री कलराज मिश्र अपनी संबोधन में कहने कि भोजपुरी खाली भाषा ही नाहीं ह वरन ई एगो संस्‍कृति हS, ई रहन-सहन के एगो पद्धति हS। भोजपुरी भाषा के आठवीं अनुसूची में शामिल होखले की संबंध में उ कहने की एकरा खातिर परयास जारी बा अउर आवेवाला संसद सत्र में ए मुद्धा के जोर-शोर से उठावल जाई।


सम्‍मान
ए कार्यक्रम की दौरान भोजपुरी साहित्‍यकार अउर कवि श्री हरिराम द्विवेदी के सेतु सम्‍मान अउर प्रख्‍यात भोजपुरी गायिका श्रीमती मालिनी अवस्‍थी के भिखारी ठाकुर सम्‍मान से सम्‍मानित कइल गइल।

साहित्यिक परिचर्चा
१-  भोजपुरी समाज के पिछड़ापन, कारन अउर निदान - डा. बी.एन. यादव की अध्यक्षता अउरी डा. लाल बाबू यादव की संचालन में आयोजित ए परिचर्चा में भोजपुरी समाज की पिछड़ेपन के दूर करे खातिर जरूरी उपायन पर चरचा कइल गइल। ए अवसर पर वक्ता लोग कहल की कृषि की क्षेत्र में निवेश न भइले, उद्योग धंधन के कमी अउर रोजगार की तलाश में युवा शक्ति के दूसरे राज्यन में पलायनो भोजपुरी समाज की पिछड़ेपन के एगो मुख्य कारन बा। ए चर्चा में आचार्य पंकज, मारीसस से आइल श्रीमती सरिता बुधू, डा. बीएन तिवारी, सतीश त्रिपाठी, डा. अरुणेश नीरन, डा. अशोक सिंह, यमुना व्यथित, मनोज श्रीवास्तव, डा. धर्मदेव तिवारी अउर अरविंद विद्रोही आदी विचारक आपन विचार रखल।



२. समकालीन भोजपुरी गद्य : स्थिति अउर गति- ए सत्र में भोजपुरी साहित्य के प्रचार-प्रसार नाहीं भइले पर चिंता जतावल गइल अउर साथे-साथे भोजपुरी साहित्य की प्रचार-प्रसार पर जोर देहल गइल। डा० अशोक द्विवेदी की संचालन अउर डा० रमाशंकर श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित बतकही में डा. सरिता बुधू कहली की मारीशस, फिजी, सूरीनाम आदी देसन में भोजपुरी के हालत अच्छा ना बा। अबहिन संघर्ष के जरुरत बा। भोजपुरी साहित्य की प्रचार-प्रसार खातिर मनोज भावुक भोजपुरी पुस्तक मेला आयोजित करे अउर प्रचार-प्रसार के आधुनिक संसाधनन की परयोग पर जोर देहने। डा. प्रेमशीला शुक्ल अति भावुक होके कहली की भोजपुरी साहित्य की विकास खातिर स्वस्थ आलोचना साहित्य के विकसित करे के होई। डा. कमलेश राय, डा. यादव, डा. त्रिपाठी, डा. अशोक सिंह, कुलदीप श्रीवास्तव, जवाहर लाल आदि भोजपुरिया भी भोजपुरी साहित्य की प्रचार-प्रसार के वकालत कइल।
कवि-सम्मेलन-  देस के १२ प्रतिनिधि  भोजपुरी कवि लोग काव्य -पाठ कइल लोग। एकर अध्यक्षता पंडित हरिराम द्विवेदी अउर संचालन डा. अशोक द्विवेदी कइने। इ 12गो कवि रहे लोग- चन्द्रभाल, डा. कमलेश राय, डा. अनिल ओझा नीरद, डा. अनिरुद्ध त्रिपाठी अशेष, कवयित्री सुभद्रा वीरेन्द्र, युवा कवि मनोज भावुक, हास्यावतार पंडित कुबेर नाथ मिश्र 'विचित्र', तारकेश्वर मिश्र 'राही', डा. हजारी लाल गुप्त।

लोकरंग- पारंपरिक लोक गीतन से लेके आधुनिक भोजपुरी ग़ज़ल तक के प्रस्तुति भइल। रात के 9 बजे से लेके भोर के 3 बजे ले इ कार्यक्रम चलल। ए अनोखा सांस्कृतिक कार्यक्रम के संचालन कवि मनोज भावुक कइने। अपनी प्रस्तुति से दर्शकन के भाव0विभोर करेवाला गायक रहने- कजरी साम्राज्ञी उर्मिला श्रीवास्तव, परमहंस चौरसिया (निर्गुण ), अजय अजनवी (आधुनिक ), उदय नारायण सिंह (वीर कुंवर सिंह गाथा , भोजपुरी ग़ज़ल ), रामेश्वर गोप (भिखारी ठाकुर - बारहमासा )। ए अवसर पर पंडित मुरारी लाल शर्मा के टीम मयूर नृत्य प्रस्तुत कइलस।



नटरंग- विश्व भोजपुरी सम्मेलन के दुनु दिन सांस्कृतिक सत्र के आयोजन कइल गइल। ए सत्र में मानवीय महिला सेवार्पण केंद्र, आरा बिहार के टीम, श्रीमती पूनम सिंह की निर्देशन में भिखारी ठाकुर के बहुचर्चित नाटक गबरघिचोर के मंचन कइलस त सांस्कृतिक संगम सलेमपुर,देवरिया के लगभग 50 कलाकारन के टीम मानवेन्द्र त्रिपाठी की निर्देशन में भोजपुरी नृत्य नाटिका 'मेघदूत की पूर्वांचल यात्रा' के करिश्माई प्रदर्शन कइलसि। इ एगो अद्भुत प्रस्तुति रहे। नटरंग के संचालनो विश्व भोजपुरी सम्मलेन दिल्ली के अध्यक्ष मनोज भावुक ही कइने।
समापन समारोह
दिनांक 24 अप्रैल के समापन समारोह की अवसर पर मुख्‍य अतिथि की रूप में आमंत्रित उत्‍तर प्रदेश अउर उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री श्री नारायण दत्‍त तिवारी भोजपुरी भाषा, कला संस्‍कृति, साहित्‍य अउर संगीत के सराहना करत कहने की भोजपुरी एगो तेजस्‍वी अउर मधुर भाषा भइले की साथे-साथे स्‍वतंत्रता संग्राम के भी भाषा हS। उ आगे कहने की स्‍वतंत्रता आंदोलन की दौरान जेलि में बंद स्‍वतंत्रता सेनानी, जेमें उहो रहने, बराबर एगो भोजपुरी क्रांति गीत गावे लोग जवने के बोल रहे, "राजा तोरी राजशहिया मिटाए देबो न, साहब तोरी साहबजदिया मिटाए देबो न"। उ कहने की ई भोजपुरी भाषा की व्‍यापकता अउर परभाव के अप्रतिम उदाहरन बा।
कार्यक्रम के ए सत्र के अध्‍यक्षता करत भोजपुरी समाज, दिल्‍ली के अध्‍यक्ष श्री अजीत दुबे पंद्रहवीं लोकसभा में ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव के जरिए भोजपुरी भाषा के संविधान की आठवीं अनुसूची में सामिल करे खातिर मुद्दा उठावे खातिर सर्वश्री जगदंबिका पाल, रघुवंश प्रसाद सिंह, संजय निरूपम आदि सांसदन के धन्‍यवाद करत केन्‍द्र सरकार से माँग कइने की नियम 193 के तहत ए मुद्दा के उठावल जाव अउर ए के पास करावल जाव। 

विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन के राष्‍ट्रीय महासचिव श्री अरूणेश नीरन विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन द्वारा भोजपुरी के विकास अउर उत्‍थान खातिर कइल जा रहल प्रयासन के जानकारी देत कहने की सम्‍मेलन के उदे्दश्‍य भोजपुरी भाषा, साहित्‍य अउर संस्‍‍कृति की प्रसार-प्रचार की साथ-साथ ए क्षेत्र की प्रतिभावन के आदर अउर सम्‍मान देत ओ लोगन के अनुकूल मंच प्रदान कइल भी बा।

ए दु दिवसीय सम्‍मेलन में अनेक किताबन के विमोचन आदि के कार्यक्रमो आयोजित कइल गइल। ए सम्‍पूर्ण आयोजन में विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन के अंतरराष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष श्री सतीश त्रिपाठी सहित सब प्रांतीय अध्‍यक्ष अउर अन्‍य पदाधिकारी जइसे सरिता बुधु, डा. बीएन तिवारी, डॉ अशोक सिंह, श्री अनिल ओझा नीरद, मनोज श्रीवास्‍तव, मनोज भावुक, कुलदीप श्रीवास्‍तव, कमल नारायण मिश्र अउर श्री बीएनयादव आदि उपस्थित रहे लोग।

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